Posted by & filed under Articles, Haryana, In the Press, India, Photos, Press Releases, Sulabh News.

Livemint

The village’s new name, ‘Trump Sulabh Village’, is not official, and so will not appear on maps

AP

First Published: Fri, Jun 23 2017. 04 39 PM IST

Sulabh International said naming the village after Donald Trump is meant to honour Indo-US ties and draw support for better sanitation in India. Photo: Alex Brandon/AP

Sulabh International said naming the village after Donald Trump is meant to honour Indo-US ties and draw support for better sanitation in India. Photo: Alex Brandon/AP

Marora (Haryana): Toilet charity Sulabh International is leading an effort to rename a tiny, north Indian village after US President Donald Trump, saying the gesture is meant to honour relations with the US and draw support for better sanitation in India.

The new name, “Trump Sulabh Village”, is not official, and so will not appear on maps.

Many of the 400 villagers said they had no idea who Trump is. But they are delighted that their village elders agreed to the promotional gimmick because it also means they will receive free toilets in each of the village’s 60 or so mud-built houses. None of the funding for the new toilets is coming from Trump or the US.

“I don’t understand why they couldn’t name it after our own prime minister,” said construction worker Sajid Hussain. Still, he’s happy for the toilet-building initiative and hopes it is followed with funding for education, electricity and other improvements.

For an inauguration attended by media on Friday, organizers coached villagers to shout “Donald Trump zindabad”. The ceremony was staged just before Prime Minister Narendra Modi heads to Washington for a sit-down with Trump.

The charity’s founder, Bindeshwar Pathak, acknowledged that naming the village after Trump was a stunt aimed at drawing more attention—and hopefully funding—for their efforts to improve sanitation across India.

“Trump is the president of the leading nation in the world, so that’s why I chose him,” he said.

The fact that there are few toilets in the dusty village of Marora, about 70km north of New Delhi, is not unusual. More than 60% of India’s 1.3 billion people still defecate in the open, and dysentery kills hundreds of millions of children every year.

“Women in the village in particular suffer without toilets,” said Poonam, a housewife. She hopes the campaign to rename the village draws attention to the dangers women face in having to venture into forests for bathroom privacy, putting them at risk of sexual assault. Some, like Poonam, are also forced to drop out of school once they begin menstruating.

The charity aims to build toilets in about 600,000 more villages across the country.

Meanwhile, Marora is hoping to become the first village in Haryana to eliminate open defecation altogether.

Posted by & filed under Articles, Haryana, In the Press, India, Photos, Press Releases, Sulabh News.

Fri, Jun 23 2017 17:15 IST

Nuh (Haryana): Trump Sulabh Village - inauguration - Bindeshwar Pathak

Nuh: Sulabh International founder and chief, Bindeshwar Pathak during the inauguration of Trump Sulabh Village at Nuh village, Haryana on June 23, 2017. The gesture of renaming the village is meant to honor relations with the US and draw support for better sanitation in India.

Nuh (Haryana): Trump Sulabh Village - inauguration - Bindeshwar Pathak

 

Nuh (Haryana): Trump Sulabh Village - inauguration - Bindeshwar Pathak

 

Nuh (Haryana): Trump Sulabh Village - inauguration - Bindeshwar Pathak

 

Nuh (Haryana): Trump Sulabh Village - inauguration - Bindeshwar Pathak

 

Source : http://www.prokerala.com/news/photos/nuh-haryana-trump-sulabh-village-inauguration-261736.html#photo-1

 

Posted by & filed under Articles, Haryana, In the Press, India, Photos, Press Releases, Sulabh News.

Amar Ujala

 

ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम

Updated Fri, 23 Jun 2017 05:15 PM IST

Toilet charity names Haryana village after us president Donald Trump

अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर हरियाणा के मेवात जिले की मरोड़ा ग्राम पंचायत का नाम रखा जाएगा। शुक्रवार को सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक गांव मरोड़ा में उद्घाटन करेंगे। बता दें कि मरोड़ा, निजामपुर और छावा तीनों गांव की संयुक्त पंचायत है। इन तीनों गांवों को अब ट्रंप सुलभ ग्राम के नाम से जाना जाएगा।

Toilet charity names Haryana village after us president Donald Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति के नाम पर उनके गांव का नाम रखे जाने से गांव के लोग खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब उनके गांव की तकदीर और तस्वीर दोनों ही बदलने वाली है।

Toilet charity names Haryana village after us president Donald Trump

शुक्रवार को गांव में  शौचालय बनाने का भी उद्घाटन किया जाएगा। गांव मरोड़ा निवासी रूजदार, जब्बार ओर कासिम का कहना है कि जब उनको पता चला है कि उनके गांव का नाम अमेरिका के राष्ट्रपति के नाम पर रखा जा रहा है, तब से उनकी खुशी का ठिकाना नही रहा है।

Toilet charity names Haryana village after us president Donald Trump

आज उनका गांव दुनिया के मानचित्र पर आ गया है। ट्रंप के गोद लेने से उनके गांव में बिजली पानी की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि उनको इस बात की भी खुशी है कि मरोड़ा, निजामपुर ओर छावा तीनों गांवों का नाम एक ही होगा।

Toilet charity names Haryana village after us president Donald Trump

वही, गांव की महिला अनीसा का कहना है कि वो अनपढ़ है वह ये नही जानती की उनके गांव को किसने गोद लिया है। पर सुना है कि कोई बड़ा आदमी है जो उनके गांव में काम करेगा। शायद अब उनके सिर से पानी लाने का मटका उतर सकेगा। आप को बता दें कि गांव मरोड़ा, निजामपुर और छावा गांव की करीब 4000 की आबादी है।  जिसमें करीब 1500 वोट हैं। फिलहाल गांव छावा से गांव का सरपंच है।

Source : http://www.amarujala.com/photo-gallery/delhi-ncr/toilet-charity-names-haryana-village-after-us-president-donald-trump

Posted by & filed under Articles, Haryana, In the Press, India, Photos, Press Releases, Sulabh News.

दैनिक जागरण

By JP Yadav 
Publish Date:Fri, 23 Jun 2017 01:45 PM (IST)
अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर भारत में बना 'ट्रंप गांव', जानें पूरा माजरा

सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन ने मेवात के मरोडा गांव को गोद लिया है।

मेवात (जेएनएन)। पूरी तरह खुले में शौचमुक्त होने पर मेवात के एक गांव का नाम अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नाम पर रख दिया गया है। सुलभ इंटरनैशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन ने मेवात के मरोडा गांव को गोद लिया है। अब इस गांव को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का नाम देने के बाद इसका विकास किया जाएगा। इसका नाम ट्रंप सुलभ गांव रखा गया है।

शुक्रवार को मरोड़ा गांव में प्रोजेक्ट के पहले चरण का उद्घाटन सुलभ के संस्थापक ट्रंप सुलभ गांव ने किया। सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन की मानद उपाध्यक्ष आरती अरोड़ा ने बताया कि मेवात क्षेत्र देश के सबसे पिछडे क्षेत्रों में शुमार है। यहां आज भी लोग मूलभूत जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। यहां पर विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

डोनाल्ड ट्रंप का क्या है हरियाणा से लिंक, तस्वीरों के जरिये जानें

इसलिए रखा गया ‘ट्रंप सुलभ गांव’

पिछले दिनों सुलभ संस्था के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने अमेरिका का दौरा किया था। वे वहां कुछ भारतीयों से मिले। उनके विचार सुन डॉ. पाठक ने देश के पिछड़े क्षेत्रों को विकसित करने की ठानी। मरोड़ा गांव का नाम ट्रंप सुलभ गांव रखने के पीछे बड़ी वजह बताई गई है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 जून के बाद अमेरिका दौरे पर जा रहे हैं। सुलभ बिंदेश्वर पाठक का कहना है यह प्रोजेक्ट भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में भी काम करेगा।

डॉ. बिंदेश्वर पाठक के मुताबिक गांव का नाम ट्रंप के नाम पर रखने से यहां विजिट पर आने वाले अमेरिकी और एनआरआइ लोगों को गांव के प्रति जुड़ाव महसूस होगा।

Source : http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-ncr-trump-sulabh-village-started-work-from-today-16247139.html

Posted by & filed under Articles, Haryana, In the Press, India, Photos, Press Releases, Sulabh News.

AajTak-Hindi News

ट्रंप के नामपर गांव का नाम

आशुतोष मिश्रा [Edited By: विकास कुमार]

23 जून 2017, अपडेटेड 16:28 IST

हरियाणा में एक ऐसा गांव है जिसका नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रख दिया गया है.

हरियाणा के मेवात में मरोड़ा गांव को अब ‘ट्रंप ग्राम’ के नाम से भी जाना जाएगा. हालांकि सरकारी दस्तावेजों में अभी भी यह मरोड़ा गांव के नाम से ही जाना जाएगा लेकिन गांव वाले इस गांव को राष्ट्रपति ट्रंप का नाम दिए जाने से बेहद खुश हैं.

आइए, आपको बताते हैं कि आखिर इस गांव का नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर क्यों रखा गया? इस बदलाव शुरुआत की कहानी होती है गांव में शौचालयों की कमी से.

हरियाणा के मेवात में मरोड़ा गांव है. गरीबी से जूझ रहे 160 घरों के इस गांव में शौचालय नहीं है. गांव की बहू-बेटियों को घरों में शौचालय ना होने की वजह से सालों तक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है.

गांव की लड़कियों ने आज तक से बातचीत में अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि कैसे उन्हें घरों में शौचालय न बने होने की वजह से 3-3 किलोमीटर दूर शौच के लिए जाना पड़ता था.

जब हमने लड़कियों पूछा कि उन्होंने अपने गांव के सरपंच से शिकायत करके गांव के हर घर में शौचालय बनाने का दबाव क्यों नहीं बनाया तो इन लड़कियों ने कहा कि सरपंच ने कभी कुछ नहीं किया. गांव के वर्तमान सरपंच शौकत अली ने इसके लिए पुराने सरपंच को दोषी ठहरा दिया.

लेकिन अब निजी संस्था द्वारा ही सही हर घर में शौचालय बन जाने से गांव की औरतें और लड़कियां खुशी हैं.

कहानी सिर्फ यही तक सीमित नहीं है. दिलचस्प यह है कि आखिर हरियाणा के एक छोटे से गांव का नाम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश और उसके सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति के नाम पर कैसे पड़ा?

इस गांव के हर घर में शौचालय बनाने का काम निजी सामाजिक संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने शुरू किया है सुलभ ने ही यह तय किया कि इस गांव का नाम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखा जाए.

इस बारे में सुलभ इंटरनेशनल के चेयरमैन बिंदेश्वर पाठक का कहना है, ‘इन सभी घरों में ट्रंप के नाम पर ही शौचालय बनाए जा रहे हैं. गांव के बच्चे-बच्चे को अब ट्रंप का नाम और वह कौन हैं, इस बारे में पता है और इन बच्चों को भी खुशी है कि अभी उनका गांव डोनाल्ड ट्रंप के नाम से जाना जाएगा.’ प्रधानमंत्री मोदी इसी महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल ट्रंप से अमेरिका में मुलाकात करेंगे. अमेरिका में मुलाकात करेंगे मुलाकात के ठीक पहले उत्तर भारत का एक गांव और उसकी पंचायत राष्ट्रपति ट्रंप के नाम से जाना जाएगा.

Source : http://aajtak.intoday.in/story/haryana-donald-trump-sulabh-international-bindeshwar-pathak-1-937146.html

 

Posted by & filed under Articles, In the Press, India, Maharashtra, Photos, Press Releases, Sulabh News.

Image result for logo pune mirror

IANS | Jun 21, 2017

Full of fascinating knick-knacks, Delhi’s Sulabh International Museum of Toilets is a unique establishment

NEW DELHI Full of strange facts and objects, our museums and history books carry some very interesting stories from bygone times. But one peculiar piece that doesn’t find space anywhere is about a French monarch’s struggle with constipation that led him to have a commode built under his throne.

The height of glory for toilets was reached when King Louis XIV gave audience while using one, prompting his court jester to remark that he found it a bit strange that while the king preferred to eat in privacy, he chose to ease himself in public.

The replica of his throne is on display at the Sulabh International Museum of Toilets, in the Dwarka area of west Delhi, which traces 4,500 years of history of toilets. Not as big as other museums in the city, Sulabh has an amazing collection of intriguing facts, pictures and objects detailing the evolution of sanitation from 2,500 BC to date.

The very fact that there is a museum that displays types of toilet seats —from wooden to ornamental, from electric to floral, may come as a surprise to many. Sulabh was established by social reformer Bindeshwar Pathak with the help of curators like Frittz Lischka from Austria and 80 to 90 other professionals around the world.

Tracing the history of the evolution of toilets seems a bit ironical in India, where, even today, many people defecate in the open, often near railway tracks. But India was one of the pioneers in this field.

Excavations at Mohenjo-Daro confirm the existence of common baths and private toilets in households.

The exhibition room displays write-ups on and drawings and replicas of toilets and sanitation practices from ancient Egypt, Babylonia, Greece, Jerusalem, Crete and Rome.

Entry is free to the museum, open on all days except national holidays.

Source : http://punemirror.indiatimes.com/news/india/museum-traces-history-of-toilets/articleshow/59240922.cms

Posted by & filed under Articles, Delhi, In the Press, India, Press Releases, Sulabh News.

Business Standard

IANS  |  New Delhi June 20, 2017

Full of strange facts and objects, our museums and history books carry some very interesting stories from bygone times. But one peculiar piece that doesn’t find space anywhere is about a French monarch’s struggle with constipation that led him to have a commode built under his throne.

Height of glory for toilets was reached when King Louis XIV gave audience while using it, prompting his court jester to remark that he found it a bit strange that while the king preferred to eat in privacy, he chose to ease himself in public.

The replica of his throne is on display at the Sulabh International Museum of Toilets, in the Dwarka area of west Delhi, which traces 4,500 years of history of toilets.

Not as big as other museums in the city, Sulabh has an amazing collection of intriguing facts, pictures and objects detailing the evolution of sanitation from 2,500 BC to date.

The very fact that there is a museum that displays types of toilet seats — from wooden to ornamental, from electric to floral, may come as a surprise to many.

Sulabh was established by social reformer Bindeshwar Pathak with the help of curators like Frittz Lischka from Austria and 80 to 90 other professionals around the world.

“It was established with objectives of educating and exploring historical trends in development of toilets across the world,” Museum Curator Bageshwar Jha told IANS.

The existence of toilet facilities has a long history, possibly older than that of the Roman Empire.

Sanitation has been the index of civilisation and the museum artefacts are displayed chronologically to map the developments beginning from the Indus Valley civilisation during the third millennium BC progressing on to the latest developments till the end of the 20th century.

Tracing the history of the evolution of toilets seems a bit ironical in India, where, even today, many people defecate in the open, often near railway tracks. But India was one of the pioneers in this field.

Excavations at Mohenjo-Daro confirm the existence of common baths and private toilets in households.

The exhibition room displays write-ups on and drawings and replicas of toilets and sanitation practices from ancient Egypt, Babylonia, Greece, Jerusalem, Crete and Rome.

According to the literature published by the museum, there was a lot of jest and humour relating to toilet habits and toilet appurtenances.

“There was a time when ballets were performed with basket of night soil in the form of hood, on the head or a tin plate commode moving around with toilet sounds. The clothes were spotted with accessories from the toilet,” Sulabh Assistant Curator Shikha Verma said.

Britain in ancient times created fantasies in stoneware toilets and bath.

Ornately carved and painted urinals and commodes from the country attract attention and are a source of amusement. The pictures of medieval water closets at the museum are worthy of mention.

A replica of the medieval mobile commodes in the shape of a treasure chest, which the English used while camping out for a hunt, also finds space at the museum.

“A few years ago, French artist Benjamin Zilberman gifted the model of Mr. Pee and Poo to the museum,” said Jha.

“A man named Giri Kumar from Andhra Pradesh sent to us a model of a convertible seat designed by him. The seat can be used both in the Indian and also in the western style according to one’s convenience,” he added.

“Toilet is a part of the history of human hygiene, which is a critical chapter in the history of human civilisation and cannot be isolated,” the curator said.

Jha laments the fact that personal and community hygiene and the “well-being of entire humanity” did not get the attention it deserved.

Entry is free to the museum open on all days except national holidays.

–IANS

mg/hs

(This story has not been edited by Business Standard staff and is auto-generated from a syndicated feed.)

Source : http://www.business-standard.com/article/news-ians/museum-with-a-difference-tracing-4-500-year-history-of-toilets-117062000242_1.html

Posted by & filed under Articles, Blog, Delhi, In the Press, India, Photos, Sulabh News.

Posted by Umesh Kumar Ray in Hindi, Society
June 16, 2017

11 जून को जारी ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ फिल्म के ट्रेलर को खूब सराहना मिल रही है। ट्रेलर रिलीज़ के बाद से फेसबुक पर अब तक 11 मिलियन लोग इसे देख चुके हैं। यूट्यूब पर इसे अब तक 12 मिलियन लोगों ने देखा है। श्री नारायण सिंह के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मुख्य किरदार अक्षय कुमार व भूमि पेडनेकर निभा रहे हैं। जैसा कि नाम व ट्रेलर से पता चलता है कि फिल्म का ताना-बाना टॉयलेट यानी शौचालय के इर्द गिर्द बुना गया है। फिल्म का कॉन्सेप्ट लोगों को खूब भा रहा है और करण जौहर से लेकर अनिल कपूर तक इसकी सराहना कर रहे हैं।

खैर, फिल्म के ट्रेलर और कॉन्सेप्ट ने अगर आपको भी आकर्षित किया है, तो आपको देश की राजधानी दिल्ली के पालम डबरी रोड पर स्थित टॉयलेट म्यूज़ियम जरूर देखना चाहिए। इस म्यूज़ियम में शौचालय के इतिहास को संजोया गया है। इस बेहद छोटे-से म्यूज़ियम में बहुत कुछ है, जिन्हें देखकर आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे और सहसा ही आपके मुंह से निकलेगा-अच्छा, ऐसा भी था क्या!

Sulabh International Museum Of Toilet

सुलभ इंटरनेशनल के इस म्यूज़ियम में शौचालय का पूरा इतिहास दर्ज़ है। संभवतः यह विश्व का एक मात्र म्यूज़ियम है, जहां शौचालय के संबंध में मुकम्मल जानकारी उपलब्ध है। इसमें शौचालय की विकास यात्रा को बेहद बारीकी और खूबसूरती से दर्शाया गया है।

म्यूज़ियम में आप जाएंगे, तो आपको पता चलेगा कि विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता मोहनजोदाड़ो के वक्त भी शौचालय हुआ करते थे और इन शौचालयों को सीवर लाइन से जोड़ा गया था, जिनके रास्ते मल और अपशिष्ट पदार्थ बाहर जाया करते थे। इससे साफ है कि उस वक्त भी शौचालय का महत्व था और लोग खुले में शौच नहीं करते थे। म्यूज़ियम से ही यह भी पता चलता है कि आर्यों के आने के बाद भारत में खुले में शौच की प्रथा शुरू हुई लेकिन खुले में शौच करने के कुछ कायदे भी बताए गए थे।

इस म्यूज़ियम में शौचालय को लेकर सूक्ष्म से सूक्ष्म सूचना दी गई है। इन्हीं सूचनाओं में एक सूचना यह भी है कि यूरोप में वर्ष 1348 से 1350 के बीच प्लेग महामारी फैली थी, जिसमें असंख्य लोग मारे गए थे। इसे इतिहास में ब्लैक डेथ के नाम से जाना जाता था। प्लेग फैलने की वजह यह थी कि उस वक्त अच्छे सीवर सिस्टम नहीं थे जिस कारण वे भर जाते थे जिससे मानव मल सड़कों-गलियों में बहता था। इस गंदगी के चलते चूहों की संख्या बढ़ी और प्लेग की बीमारी ने सैकड़ों लोगों को मौत की नींद सुला दिया। म्यूज़ियम में लगी एक तस्वीर बताती है कि मिडीविल यूरोप में लोग अपने घरों की खिड़कियों से मानव मल बाहर फेंक दिया करते थे। सन 1088 तक लंदन व पेरिस में घरों से निकले मानव मल को सड़कों पर रखा जाता था, जहां से इसे बाद में उठाकर शहरों के बाहर फेंका जाता था।

म्यूज़ियम में कमोड की विकास यात्रा को भी सुंदर तरीके से दिखाया गया है।

यह जानकर बहुत अजीब लग सकता है कि फ्रांस के राजा लुई चौदहवें (वर्ष 1638 से 1715) ने अपने सिंहासन के नीचे कमोड लगा रखा था। उसके ढक्कन को सीट बनाकर वह बैठा करते थे। ज़रूरत पड़ती, तो ढक्कन उठाकर वे नित्यक्रिया निपटा लेते थे और वह भी दरबारियों के सामने। म्यूज़ियम के तथ्य बताते हैं कि उनके दरबारी कई बार दबी ज़बान में शिकायत भी करते थे कि शहंशाह खाना तो लोगों की गैरमौजूदगी में खाते हैं, लेकिन नित्यक्रिया सबके सामने निबटाते हैं।

Sulabh International Museum Of Toilet

म्यूज़ियम से यह भी पता चलता है कि महारानी एलिजाबेथ-1 के दरबारी कवि जॉन हेरिंग्टन ने 1596 में पहला फ्लश टॉयलेट बनवाया था। महारानी एलिजाबेथ और जॉन हेरिंग्टन के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति को इस टॉयलेट के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं थी।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के वर्धा आश्रम में बापू द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शौचागार के बारे में भी म्यूज़ियम में विस्तार से बताया गया है कि सेप्टिक टैंक वाले उक्त शौचालय का निर्माण ई.जी. विलियम्सन ने किया था। बापू खुद शौचालय साफ किया करते थे और जब भी नित्यक्रिया करने जाते तो अपने साथ पत्र-पत्रिकाएं, अखबारों की कतरने आदि ले जाया करते थे।

इन सबके अलावा भी बहुत कुछ है जो इस म्यूज़ियम को खास बनाता है। इस म्यूज़ियम का निर्माण वर्ष 1992 में किया गया था। इसके लिए व्यापक तौर पर शोध किया गया था। बिंदेश्वर पाठक कहते हैं, “वर्ष 1992 में मैंने मैडम तुसाड का वैक्स म्यूज़ियम देखा। इस म्यूज़ियम को देखकर मेरे मन में खयाल आया कि भारत में भी एक ऐसा म्यूज़ियम बनाना चाहिए, जो विश्व के दूसरे म्यूज़ियमों से एकदम अलग हो। काफी सोच-विचार करने के बाद मैंने तय किया कि क्यों न टॉयलेट म्यूज़ियम बनाया जाए।” पाठक बताते हैं, “विश्वभर के 100 देशों के दूतावासों और राजदूतों को पत्र भेजकर अपील की गई कि उनके पास शौचालय से जुड़े जो भी ऐतिहासिक और समसामयिक तथ्य हैं, उन्हें साझा करें। लम्बे शोध और विचार-विमर्श के बाद इस म्यूज़ियम को तैयार किया गया।”

टॉयलेट म्यूज़ियम के क्यूरेटर बागेश्वर झा वर्ष 2001 से यहां कार्यरत हैं। वह कहते हैं, “चूंकि मैं म्यूज़ियम का क्यूरेटर हूं, तो इस म्यूज़ियम की हर चीज़ मुझे पसंद है लेकिन बतौर व्यक्ति अगर मैं बात करूं तो अमेरिका के इलेक्ट्रानिक टॉयलेट का रेप्लिका मुझे बेहद आकर्षित करता है। इसकी वजह यह है कि विश्वभर में पानी की किल्लत मुंह बांए खड़ी है, ऐसे में फ्लश टॉयलेट में पानी बहाना उचित नहीं। इलेक्ट्रानिक टॉयलेट में एक बूंद पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती है, इसलिए यह मुझे बहुत पसंद है।”

ऐतिहासिक इमारतों और पर्यटनस्थलों से भरी इस दिल्ली में ही यह म्यूज़ियम उतनी लोकप्रियता नहीं पा सका जितनी अपेक्षित थी, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल चुकी है। वर्ष 2014 में टाइम मैगजीन ने विश्व के 10 अद्भुत म्यूज़ियमों की सूची में इस म्यूज़ियम को भी शामिल किया था।

बिंदेश्वर पाठक ने कहा, “म्यूज़ियम बनाने का उद्देश्य महज़ लोगों की भीड़ इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि इसके जरिए लोगों को शौचालय की विकास यात्रा के बारे में बताना मेरा असल उद्देश्य है। इस म्यूज़ियम के जरिए मैं नीति निर्धारकों को बताना चाहता हूं कि वे देखें कि उनसे पूर्व के नीति निर्धारकों ने किस तरह काम किया था।”

Source : https://www.youthkiawaaz.com/2017/06/sulabh-international-toilet-museum-delhi/

Posted by & filed under Articles, Haryana, In the Press, India, International, Photos, Press Releases, Sulabh News.

Image result for the times of india logo

Bagish Jha| TNN | Jun 14, 2017

US President Donald Trump

US President Donald Trump

GURGAON: Sulabh International founder and chief Bindeshwar Pathakhas announced that an open defecation-free (ODF) village in Mewat will be named after the US President Donald Trump. Sulabh believes the move will help draw attention of the world towards India’s cleanliness campaign.

Sulabh International is currently working in some villages of Mewat to make them ODF, one of which will be named after Trump. “We have chosen the area (Mewat), but the village to be named after Trump will be decided in the next few days,” said Pathak over phone from the US, adding he will visit Mewat to interact with villagers after he returns to India in the next few days, during which, a village will be chosen for adoption.

Pathak made the announcement at a community event organised in the suburbs of Washington DC. “The Indian government is trying to rid the country of open defecation. Our organisation is also working in this direction. We urge the global community to help us realise the goal of sanitation and cleanliness in India,” he said, adding that big corporate houses can adopt a village, block or taluka as part of the campaign.

He said the idea behind naming a village after Trump is to highlight the issue of sanitation and cleanliness globally, and seek participation of large number of people in the campaign. “We expect many more people to come forward to join this initiative,” said Pathak. The Prime Minister has urged that we make the entire country clean by October 2, 2019, the 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi, but for this, everyone will have to make an effort, he said.

Haryana government is aiming to make all its districts ODF by September 2017. Chief minister Manohar Lal Khattar said in Chandigarh on May 26 all the districts of state will be declared ODF by September, earlier than the previous deadline of December 2017. He claimed rural areas would be made ODF by end-June, while urban areas will be declared ODF by September. Till now, 6,132 gram panchayats have become ODF in the state, while the remaining 200-300 are likely to be made ODF by the next few months.

The state government has also tied up with World Bank to work towards making Haryana villages ODF Plus. Under the scheme, along with ODF, a village will also get a solid waste management facility, sewerage line, storm water drain and concrete roads. Initially, 44 villages, two in each district, will be included in the scheme as a pilot, to ensure complete cleanliness by November this year.

Source : http://timesofindia.indiatimes.com/city/chandigarh/sulabh-to-rename-a-mewat-village-after-trump-as-part-of-swachh-bharat/articleshow/59134534.cms

Posted by & filed under Articles, In the Press, International, Press Releases, Sulabh News.

Image result for the times of india logo

Bagish Jha| TNN | Updated: Jun 14, 2017

(AFP photo)

(AFP photo)

GURGAON: Sulabh International founder and chief Bindeshwar Pathak has announced that an open defecation-free (ODF) village in Mewat will be named after the US President Donald Trump.
Sulabh believes the move will help draw the attention of the world towards India’s cleanliness campaign. The organisation is currently working in some villages of Mewat to make them ODF, one of which will be named after Trump. “We have chosen the area (Mewat), but the village to be named after Trump will be decided in the next few days,” said Pathak over phone from the US, adding he will visit Mewat to interact with villagers after he returns to India in the next few days, during which, a village will be chosen for adoption. Pathak made the announcement at a community event organised in the suburbs of Washington DC.
“The Indian government is trying to rid the country of open defecation. Our organisation is also working in this direction. We urge the global community to help us realise the goal of sanitation in India,” he said, adding that corporates can adopt a village, block or taluka as part of the campaign.

Source : http://timesofindia.indiatimes.com/india/haryanas-open-defecation-free-village-to-be-named-after-trump/articleshow/59136258.cms