Posted by & filed under Articles, Delhi, In the Press, Photos.

देश में सुलभ शौचालय की शुरुआत करने वाले शख्स बिंदेश्वर पाठक दुनिया के लिये एक मिसाल हैं। 1943 में बिहार के वैशाली जिले में जन्में बिंदेश्वर पाठक संभ्रांत परिवार से आते हैं। छोटे थे तो 9 कमरों के घर में शौचालय नहीं था। चार स्कूलों में पाठक ने पढ़ाई की लेकिन इनमें से भी किसी में शौचालय नहीं था। बड़े हुए तो धीरे -धीरे समझ गये कि यही हाल भारत के 7,00,000 गांवों और सैकड़ों शहरों का भी है। पटना विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातक किया। 1968-69 में भंगी मुक्ति विभाग में काम करने का मौका मिला। समिति ने ही उन्हें सुरक्षित और सस्ती शौचालय तकनीक विकसित करने और दलितों के सम्मान के लिए काम करने को कहा। इसके बाद वे बेतिया की दलित बस्ती में तीन महीने रहने चले गये जहां से उनकी जिंदगी का रुख बदल गया। यहां स्क्वैंजर्स (सिर पर मैला ढोने वाले रहते थे)। इनकी पीड़ा देख पाठक ने अपना जीवन स्कैवेंजरों के लिए समर्पित करने की ठान ली। 1970 में पाठक ने सुलभ की शुरुआत की। स्वच्छता का काम करने वाले गैर-सरकारी संस्थानों में सुलभ सबसे बड़ा है। इसमें 60,000 स्वैच्छिक कार्यकर्ता हैं। सुलभ के तहत 2014 तक 12,00,000 घरेलू और 8,500 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका था।

Source : http://dainiktribuneonline.com/2015/03/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%AD-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE/#.VRo28uH3VL8.twitter