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इलाहाबाद। परंपरा को तोड़ते हुए सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा से मुक्त कराई गई महिलाएं भी कुंभ मेले में संगम तट पर शीर्ष पुजारियों के साथ मिलकर पूजा अर्चना करेंगी। पूर्व में इन महिलाओं को अछूत समझा जाता था। राजस्थान के अलवर और टोंक जिलों से करीब सौ ऐसी महिलाओं को पहली बार सात फरवरी को कुंभ मेले में संगम तट पर पवित्र जल में डुबकी लगाने और पूजा अर्चना करने का मौका मिलेगा।  सामाजिक बदलाव की इस परंपरा की शुरूआत करने वाले बिंदेश्वरी पाठक ने बताया कि सामाजिक उत्थान की दिशा में यह एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि पूर्व में सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा का हिस्सा रही ए महिलाएं शीर्ष हिंदू पुजारियों के साथ मिलकर पूजा अर्चना करेंगी। पाठक ने बताया, ‘‘ न केवल इतना बल्कि वे कुछ शीर्ष हिंदू धार्मिक नेताओं के साथ भोजन भी करेंगी जिनमें नगा साधु भी शामिल हैं। हम कुंभ मेले में प्रवास के दौरान हिंदू धर्म के अखाड़ों के कुछ शीर्ष धार्मिक नेताओं के साथ उनकी बातचीत कराने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।’’ सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक ने कहा कि उनके संगठन ने इस कुप्रथा में लगे और अछूत समझे जाने वाले लोगों को इससे मुक्ति दिलाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी कुप्रथा थी जो करीब पांच हजार साल पुरानी थी।

Source : http://www.dastaktimes.org/?p=37911