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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : किसी समय सिर पर मैला ढो चुकी महिलाएं अब लोकपाल के रूप में कुर्सी पर आसीन होकर न्याय बांटेंगी। स्वयंसेवी संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने ऐसी सात महिलाओं को अपने संस्थान में लोकपाल के पद पर नियुक्त किया है। सोमवार को महावीर एंक्लेव स्थित सुलभ परिसर में इन महिलाओं को लोकपाल के पद की शपथ दिलाई गई। ये महिलाएं सुलभ परिवार के करीब 70 हजार सदस्यों की शिकायतों व आपसी विवादों का निबटारा करेंगी।

जिन सात महिलाओं को लोकपाल के पद की शपथ दिलाई गई, उनमें से छह जहां राजस्थान के टोंक व अलवर से हैं, वहीं एक महिला गाजियाबाद जिले की नेगपुर गांव की रहने वाली हैं। शपथ ग्रहण पर आयोजित समारोह में सुलभ के संस्थापक डॉ.बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि संसद ने हाल में मैला ढोने की कुप्रथा पर पाबंदी लगा दी है। विधेयक को अब राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक विधेयक के संसद में पारित होने के उपलक्ष्य में संस्थान ने ऐसी महिलाओं को लोकपाल के पद पर नियुक्त करने का फैसला किया, जो इस कुप्रथा के कारण सर्वाधिक प्रभावित थीं। लोकपाल से जुड़ी जिम्मेदारी ग्रहण करने के बाद इनके अंदर आत्मविश्वास का संचार होगा।

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एक वर्ष पूर्व तक गांव में हम लोग अछूतों की तरह जीवनयापन करते थे। समाज की उपेक्षा के कारण ही हम लोग कभी पढ़ लिख नहीं पाए, लेकिन आज जो सम्मान मिला है वह सारे दुखों पर भारी है। यह सोचकर काफी खुशी होती है कि अब मैं सुलभ संस्था में लोकपाल के पद पर विराजमान हूं। मेरी कोशिश रहेगी कि मैं अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी से करूं।

सोनी वालिया,

नेगपुर, गाजियाबाद

Source : http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-10711879.html