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ससुराल में शौचालय का उचित प्रबंध नहीं होने की वजह से अपने पति से विद्रोह करने वाली एक दलित महिला को स्वच्छता अभियान के प्रति समर्पित सुलभ इंटरनेशनल संस्था ने दो लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है.

टॉयलेट ना होने से नाराज होकर बच्चों को लेकर आ गई थीं मायके

गौरतलब है कि देवास जिले के मुंडलाना गांव में एक दलित देवकरण मालवीय की पांचवीं कक्षा तक शिक्षित पत्नी सविता ने शौचालय के अभाव में खुले में शौच जाने की व्यवस्था से दो साल पहले विद्रोह कर अपने आठ साल के वैवाहिक जीवन को ही दांव पर लगा दिया था. वह दो बच्चों सहित अपने मायके आ गई थी और शौचालय के बिना ससुराल जाने को तैयार नहीं थी.
सुलभ इंटरनेशनल संस्था ने बताया है कि इस घटना के बारे पता लगने के बाद संस्था ने इस दलित महिला की सुविधा के लिए उसके पति की पहल पर उसके घर में इसी माह एक कम लागत का शौचालय तैयार कराया. और उसका वैवाहिक जीवन बचा लिया.

दो लाख का इनाम

सुलभ इंटरनेशनल ने सविता के साफ-सफाई के लिए जज्बे को सलाम करते हुए संस्था के संस्थापक डॉ. बिन्देश्वर पाठक ने उसे दो लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है. इस पुरस्कार को देने के लिए शीघ्र ही उसके गांव मुंडलाना में संस्था द्वारा एक समारोह आयोजित किया जाएगा. संस्था ने सविता से आग्रह किया है कि वह अपने क्षेत्र में स्वच्छता का संदेश फैलाने में सहयोग प्रदान करे. सविता ने दो साल पहले दो बच्चों सहित मायके आने के बाद अपने पति देवकरण के खिलाफ तलाक का मुकदमा भी कायम कर दिया था.
लेकिन जब न्यायिक दण्डाधिकारी (प्रथम श्रेणी) जयंत शर्मा को दोनों के बीच विवाद का कारण पता चला, तो उन्होंने उनके बीच समझौता कराने का प्रयास किया. अदालत में देवकरण, बीते 24 दिसंबर को अपने घर में शौचालय बनाने को तैयार हो गया और उसने कहा कि वह 10 जनवरी तक इसे तैयार करा लेगा.
इससे पहले सुलभ इंटरनेशनल द्वारा प्रदेश के बैतूल जिले की एक आदिवासी महिला अनिता र्ने को भी स्वच्छता के लिए पुरस्कृत किया जा चुका है, जिसने शौचालय नहीं होने की वजह से विवाह के बाद अपनी ससुराल जाने से मना कर दिया था.