Posted by & filed under Blog, In the Press, India, Photos, Press Releases, Sulabh News, Uttar Pradesh.

Hindustan Hindi News

वृंदावन, हिन्दुस्तान संवाद
Updated: 27-10-16 10:20 PM

कृष्ण की नगरी वृंदावन का ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर पहली बार अनूठी घटना का गवाह बना, जब सदियों से समाज में उपेक्षित रहीं विधवाओं ने यहां हाथों में दीपक लेकर नगर के प्राचीन ठा. राधागोपीनाथ मंदिर में प्रवेश किया और धूमधाम के साथ हर्षोल्लास से दीपोत्सव मनाया।

सुलभ इंटरनेशनल की पहल पर वृंदावन के साथ ही वाराणसी से आयीं करीब एक हजार विधवाओं ने हिस्सा लिया। दीपावली के ठीक पहले ये रोशनी खास इसलिए थी, क्योंकि सदियों से उपेक्षित जिंदगी जी रही विधवाओं महिलाओं ने इसे जलाया। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ बिंदेश्वर पाठक की पहल पर स्थानीय और वाराणसी से आयी विधवाओं ने राधागोपीनाथ मंदिर को जगमगाती रोशनी से गुलजार कर दिया।

इसके बाद विधवाओं ने रंग और पुष्पों की रंगोली से मंदिर को सजाया और फुलझड़ियों का आनंद लिया। यह दीप कार्यक्रम चार दिनों दीवाली तक चलेगा। सुलभ द्वारा यह कार्यक्रम चौथी बार आयोजित किया गया है। वृन्दावन के कुंज गली से अपने हाथों में जलते दीप और मोमबत्तियां लेकर विधवा महिलाएं अपने आश्रमों की ओर जुलूस की शक्ल में चलीं तो यहां का नजारा खास बन गया। लग रहा था मानों रोशनियों की कतार धीमी गति से लोगों की जिंदगी का अंधेरा दूर करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

इस मौके पर आश्रमों खासतौर पर साफ-सफाई की गई है और उन्हें फूलों से सजाया गया है। यहां महिलाओं ने रंगोली भी बनाई और अपने मंदिरों और आश्रमों को सजा दिया। गौरतलब है कि पिछले साल भी हजार के करीब विधवा महिलाओं ने रोशनी का ये त्यौहार मनाया था।

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक का कहना है कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में अपनी तरह से सुलभ ऐसे सकारात्मक कदम उठा रहा है। सदियों से अंधेरी जिंदगी गुजार रही विधवाओं की जिंदगी को रोशन करने के लिए सुलभ खासतौर पर यह त्यौहार मना रहा है। डॉ. पाठक की ही पहल पर कई साल से दशहरे के दौरान विधवाओं को जहां कोलकाता की यात्रा कराई जा रही है, वहीं हाल ही में उज्जैन में हुए महाकुंभ में भी विधवा महिलाओं को पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान कराया गया।

Source : http://m.livehindustan.com/news/agra/article1-Widows-smashed-the-wall-of-evil-celebrated-Diwali-in-Vrindavan-584617.html