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माननीय श्री श्री रविशंकर जी एक अमूल्य रत्न हैं। वे विश्व और मानवता के लिए भगवान् के उपहार हैं। धरती पर ऐसी आत्माओं का बहुत कम ही आगमन होता है, लेकिन जब आती हैं तो अपने साथ द्विव्य ज्योति लाती हैं, जिससे वे विश्व को प्रकाशित करती हैं।

                मैं श्री श्री रविशंकर जी का ‘विश्व सांस्कृतिक कार्यक्रम’देखकर अभिभूत और अह्लादित हुआ। मेरे लिए बहुत ही आश्चर्यजनक अनुभव था, जब मैंने 8,500 कलाकारों को अपने वाद्य यंत्रो को एक स्वर में बजाते देखा। यह समुचित था कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम में अपना आशीर्वचन दिया। भारतीय जनता को शायद ही  ऐसे उच्चस्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने का अवसर मिले, जो इस समारोह में मिला।

                एक बार फिर श्री श्री रविशंकर जी को मेरा विन्रम नमन। मैं उनके दीर्घायुष्य एवं सुंदर जीवन की कामना करता हूँ और मेरी आशा है कि न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में लोग उनके ‘आर्ट ऑफ लिविंग’से आनंदमय तथा सर्जनात्मक जीवन की कला सीखेंगे और हम सभी को श्री श्री रविशंकर जी का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

                सुलभ-परिवार और इस देश की जनता दिल्ली में हो रहे ‘विश्व सांस्कृतिक समारोह’की सपफलता के लिए प्रार्थनापूर्वक मंगलकामना करते हैं।

विन्देश्वर पाठक,

संस्थापक,

सुलभ-स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार आंदोलन

 

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