Posted by & filed under Articles, In the Press, International.

ramdhari singh

राष्ट्र कवि डॉ रामधारी सिंह दिनकर’` की कालजयी कृतियों – भारतीय संस्कृति की चार अध्याय तथा परशुराम की प्रतीक्षा – के जयंती वर्ष के अवसर पर माननीय सांसद डॉ सी पी ठाकुर जी दवारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में २२ मई २०१५ को एक समारोह का आयोजन किया गया।

सर्वप्रथम मंचस्थ अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया, एवं दिनकरजी के चित्र को पुष्पांजलि समर्पित किये गए फिर सभी का शॉल और माला समर्पित कर स्वागत किया गया।

समारोह माननीय सांसद डॉ सी पी ठाकुर जी की अध्यक्षता में हुआ। मंच पर उपस्थित गणमान्य अतिथि थे – माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, माननीय डॉ सी पी ठाकुर , सांसद, माननीय डॉ बिन्देश्वर पाठक, संस्थापक, सुलभ इंटरनेशनल, श्रीमती उषा किरण खान एवं श्री प्रसून जोशी।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने भाषण में कहा कि “दिनकर जी का पूरा साहित्य खेत और खलिहान से निकला है। गांव और गरीब से निकला है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने दिनकर जी की लिखी मार्च 1961 एक चिट्ठी का जिक्र करते हुए बताया कि दिनकर जी ने उस चिट्ठी में जो लिखा है बिहार को सुधारने का सबसे अच्छा रास्ता ये है, कि लोग जातिओं को भूलकर गुणवान के आदर में एक हों। याद रखिए कि एक या दो जातियों के समर्थन से राज्य नहीं चलता। वो बहुतों के समर्थन से चलता है, यदि जातिवाद से हम ऊपर नहीं उठें, तो बिहार का सार्वजनिक जीवन गल जाएगा। मार्च 1961 में लिखी हुई ये चिट्ठी, बिहार के लिए आज भी उतना ही जागृत संदेश है। ये किसी राजनीति से परिचित के शब्द नहीं है, ये किसी शब्द -साधक के शब्द नहीं है, ये किसी साहित्य में रूचि रखने वाले सृजक के शब्द नहीं है, एक ऋषि तुल्य के शब्द हैं जिसको आने वाले कल दिखाई देती है और जिसके दिल में बिहार की आने वाली कल की चिंता सवार है और तब जाकर शब्द, अपने ही समाज के व्यक्ति को स्पष्ट शब्दों में कहने की ताकत रखता है।

दिनकर जी का भी सपना था बिहार आगे बढ़े, बिहार तेजस्वी, ओजस्वी, ये बिहार, सपन्न भी हो। बिहार को तेज और ओज मिले किसी से किराए पर लेने की जरूरत नहीं। उसके पास है उसे संपन्नता के अवसर चाहिए, उसको आगे बढ़ने का अवसर चाहिए और बिहार में वो ताकत है, अगर एक बार अवसर मिल गया, तो बिहार औरों को पीछे छोड़कर आगे निकल जाएगा।

हम दिनकर जी के सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उनकी साहित्य रचना की 50 साल की यात्रा आज भी हमें कुछ करने की प्रेरणा देती है, सिर्फ गीत गुनगुनाने की नहीं। हमें कुछ कर दिखलाने की प्रेरणा देती है और इसलिए आज दिनकर जी को स्मरण करते हुए उनकी साहित्य रचना का स्मरण करते हुए इस सभागृह में हम फिर से एक बार अपने आप को संकल्पबद्ध करने के अवसर के रूप में उसे देंखे। और उस संकल्प की पूर्ति के लिए दिनकर जी के आर्शीवाद हम सब पर बने रहे और बिहार के सपनों को पूरा करने के लिए सामर्थ्य के साथ हम आगे बढ़ें। “

 

Source :  https://www.facebook.com/media/set/?set=a.877543112307804.1073742237.388894784505975&type=3