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सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक ने बताया, समाज की समस्याओं पर अध्ययन और शोध पर रहेगा जोर

बीएचयू में बिंदेश्वर पाठक चेयर का प्रस्ताव

वाराणसी वरिष्ठ संवाददाता / हिन्दुस्तान / 29 अप्रैल 2016

बीएचयू में बिंदेश्वर पाठक चेयर स्थापित करने और एमए इन एक्शन सोशियोलॉजी कोर्स चलाने का प्रस्ताव सुलभ इंटरनेशनल ने बीएचयू को दिया है। यह जानकारी संयुक्त प्रेसवार्ता में सुलभ के संस्थापक पद्मभूषण डॉ बिंदेश्वर पाठक और बीएचयू सामाजिक विज्ञान फैकेल्टी के डीन प्रो. मंजीत चतुर्वेदी ने दी।

डॉ. पाठक ने बताया कि इस चेयर में समाज की समस्याओं पर अध्ययन और अनुसंधान का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि मैंने गांधी के सपनों को पूरा करने के लिए मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने के लिए सुलभ शौचालय बनवाना शुरू किया। अब तक 15 लाख से अधिक व्यक्तिगत और 85 सौ से अधिक सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया है।

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि बिंदेश्वर पाठक ने 1970 में जो शुरुआत की उसने लाखों लोगों को सिर पर मैला ढोने से मुक्ति दिलाने में सहायक रही। उन्होंने जातीय असमानता, अभिशाप को समाप्त किया है। उन्होंने कहा कि चेयर पर निर्णय बीएचयू की एकेडमिक और एग्जीक्यूटिव काउंसिल लेगी।

न्यूयार्क में ‘बिंदेश्वर पाठक डे’ घोषित : डॉ. पाठक ने बताया कि पिछले दिनों न्यूयार्क के महापौर ने उनके कार्यों को देखते हुए 14 अप्रैल 2016 को
डॉ बिंदेश्वर पाठक डे ह्य घोषित किया है। उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए सम्मान की बात है। उन्होंने लोगों को इस दिशा में किए जा रहे कार्यों में आगे आने को कहा।

गांधी के विचारों को जमीन पर उतारा

वाराणसी। डॉ बिंदेश्वर पाठक ने गांधी के विचारों को जमीन पर उतारने का काम किया। शायद यही वजह है कि देश ही नहीं विदेशों में भी पाठक जी का नाम है। इन्होंने विधवाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण काम किया है।ये बातें विद्यापीठ के वीसी डॉ. पी नाग ने गुरुवार को पराड़कर भवन में काशी पंडित सभा की ओर से आयोजित डॉ. पाठक के सम्मान समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक ने अपने अभियान में जातिवाद पर भी कड़ी चोट की है। इससे पहले सभा की ओर से सम्मान पत्र और अंगवम देकर डॉ. पाठक को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सभा के अध्यक्ष पंडित जगन्नाथ शाी, प्रो. शिवजी उपाध्याय, विनोदराव पाठक, हरिप्रसाद अधिकारी, डॉ. बीएन चतुर्वेदी, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, राजेंद्र प्रसाद पांडेय, प्रो. चंद्रमा पांडेय, प्रो. रामबचन पांडेय आदि थे। वसं

Source : http://epaper.livehindustan.com/story.aspx?id=1085599&boxid=143124398&ed_date=2016-04-29&ed_code=70&ed_page=6

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