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Navbharat Times

नवभारतटाइम्स.कॉम| Mar 10, 2017, 03.48 PM IST

सफेद साड़ी में कुम्हलाई हुई काया, चेहरे पर झुर्रियां और झुकी हुई कमर, विधवाओं की नजर जब रंग-बिरंगे फूलों की पंखुड़ियों और गुलाल पर पड़ी तो चेहरे पर होली की उमंग और खुशी आंखों में झलक रही थी।

अपनों से दूर सालों से वृंदावन में गुजर-बसर कर रहीं विधवाओं ने यहां आयोजित होली कार्यक्रम में भाग लिया। सदियों पुरानी पंरपराओं को तोड़ते हुए फूलों और गुलाल से होली खेली। नंदगांव और बरसाना की होली के बाद वृंदावन में इन विधवाओं की होली को कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में विदेशी मौजूद रहे और इनके साथ जमकर होली खेलने के साथ खुशी के लम्हों को अपने कैमरे में भी कैद किया।

वृंदावन के प्राचीन गोपीनाथ मंदिर में गुरुवार को बनारस से आईं करीब 40 विधवाओं और वृंदावन के आश्रय सदनों में रह रही सैकड़ों विधवाओं ने पिछले साल की तरह इस बार भी होली खेली।

महिलाओं के मनोरंजन के लिए म्यूजिक पार्टी की व्यवस्था की गई थी जिसने होली के भजन गाए तो हाथों से गुलाल उड़ाते हुए ये महिलाएं अपने जीवन के सारे गम भुलाकर थिरकते हुए दिखाई दीं। एक-दूसरे का हाथ पकड़कर महिलाएं नाचीं तो वहीं सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाए।

यहां एक संस्था की ओर से इनके लिए 11 क्विंटल गुलाल और 14 क्विंटल फूलों की पंखुड़ियों की व्यवस्था की गई थी। वहीं, गोकुल में गुरुवार को छड़ीमार होली खेली गई। गोपियों ने भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के साथ छड़ीमार होली खेली, वहीं कृष्ण स्वरूप ग्वालों ने लाठी से अपना बचाव किया।

Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/astro/holy-discourse/religious-news/vrindiavan-flower-holi-of-widows/articleshowprint/57575307.cms