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टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 26 2017

दुनिया का अनोखा टॉयलेट म्यूजियम, ऐसे थे पांच हजार साल पुराने टॉयलेट

देश में आज स्वच्छ भारत अभियान बड़े जोरशोर से चल रहा है। इस अभियान के तहत लोगों को साफ- सफाई और खासकर टॉयलेट के प्रयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है। गांवों कस्बों से लेकर शहरो तक में स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रह है।

लेकिन किया आपने कभी सोचा है कि टॉयलेट का इतिहास किया है इसके विकास की पूरी कहानी क्या है। आज से पहले बीते समय में टॉयलेट कैसा रहा है।

अगर आपको टॉयलेट के विकास की कहानी के बारे में जानना है तो आपको राजधानी दिल्ली के पालम में स्थित सुलभ इंटरनेशनल के इस टॉयलेट म्यूज़ियम में जाना होगा।

इस म्यूज़ियम में टॉयलेट का पूरा इतिहास दर्ज़ है। इस म्यूजियम में आपको पांच हजार साल पहले पुराने टॉयलेट के बारे में आसानी से जानकारी मिल जाएगी।

इस टॉयलेट म्यूज़ियम में मानव सभ्यता के सबसे पुराने ड्रेनेज की भी जानकारी मौजूद है। जो कि सिंधु घाटी सभ्यता के समय बना था।

3000 ईसा पूर्व की हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की संस्कृति में भी अंडरग्राउंड और ओवरग्राउंड टॉयलेट हुआ करते थे। जिससे ये भी साबित होता है कि प्राचीन भारत के लोग सैनिटेशन को लेकर ज्यादा जागरूक थे।

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने साल 1992 में देश की राजधानी दिल्ली में पहला टॉयलेट म्यूज़ियम खोला। म्यूज़ियम के क्यूरेटर बगेश्वर झा ने बताया कि जब डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने मैडम तुसाद म्यूज़ियम देखा तो उन्होंने तुरंत भारत लौटकर टॉयलेट म्यूज़ियम बनाने की ठानी थी।

इसके बाद डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने दिल्ली स्थित सभी देशों के दूतावासों को चिट्ठी लिखकर उनसे अपने-अपने देश के टॉयलेट संबंधी फैक्ट्स, फिगर्स और फोटोग्राफ्स मांगे थे। डॉ. बिंदेश्वर पाठक के इस पहल का सभी लोगों ने स्वागत किया था और सभी लोगों ने मिलकर सहयोग भी दिया।

टॉयलेट म्यूज़ियम के बारे में जानकारी मिलने के बाद धीरे-धीरे ये म्यूज़ियम बनकर तैयार भी हो गया। टाइम मैगज़ीन के सर्वे में ये म्यूज़ियम दुनिया के 10 सबसे अनोखे म्यूज़ियम में से एक है।

Source : http://www.haribhoomi.com/wild_and_weird/sulabh-toilet-museum-in-delhi