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उत्तर चौबीस परगना-कोलकाता। राजधानी कोलकाता और भारत बांग्‍लादेश सीमा से सटा और शहर के कांक्रीट जंगल से हटकर एक हराभरा सा गांव, नारियल,ताड़ के लंबे दरख्त, जगह-जगह पानी से भरे पोखर, ताल,तलैया. सब कुछ आंखों को भरमा सा देने वाला,अचानक गांव के बीचोंबीच बने एक पोखर के सामने आते हैं तीन लोग, तीनों प्रौढ़ से लगते,जिनके बदन पर काले-काले चकत्ते हैं, त्वचा की बीमारी सी,दुबले-पतले बीमार से। खास बात यह है कि इस पोखर के पानी के पास ये सब मुस्कराते हुए खड़े हैं, इसका पानी अब इन्हें डराता नहीं बल्कि इनके लिए अब यह 'जीवनदायी'बन गया है जबकि महज नौ माह पूर्व यह पानी बहुत कुछ पौराणिक कथाओं वाले उस सरोवर'के किस्सों सा था जिसको पीने से पात्र बीमार पड़ जाते थे और मर तक जाते थे।  यही पानी बरसों-बरस से पीने से इनकी यह हालत हुई तब इसका पानी आर्सेनिक 'प्रदूषण' या'जहर' भरा हुआ करता था। तीनों अपने 'व्यथित'शरीर की पीड़ा दिखा रहे हैं, उनमें से एक स्वपन दास बंगला में मुस्कराते हुए कहते हैं'दीदी अब तो मैं ठीक हो रहा हूं, पीड़ा कम हो रही है।'पोखर में लगा एक छोटा संयंत्र दिखाता हुआ कहता है 'इसकी वजह से अब हमें वो खराब पानी पीने को नहीं मिलता, जिसे पीने से हम सब, हमारे बच्चे सब बीमार सब पड़ गए।'

स्वैच्छिक संगठन ने गांव के मधुसूदनकाटी कृषक कल्याण समिति (एमकेकेएस) और एक फ़्रांसीसी ग़ैर सरकारी संगठन '1001 फाउटेंन्स’ के साथ मिलकर यहां गत नवंबर में सुलभ सेफ ड्रिंकिंग वॉटर प्रोजेक्ट (एसएसडीडब्ल्‍यूपी) शुरू किए जाने की एक अनूठी पहल शुरू की है, जिसके तहत आर्सेनिक प्रदूषण वाले इस पोखर सहित तीन अन्य स्थानों में पानी के शुद्धीकरण के संयंत्र लगाए गए। उत्तर 24 परगना जिले के अलावा यह संयंत्र नादिया जिले के मायापुर और मुर्शिदाबाद जिले में लगाए गए हैं। 

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक तथा अध्‍यक्ष बताते हैं, 'हम फिलहाल महज पचास पैसे प्रति लीटर की दर से ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध करवा रहे हैं। यह मिनरल वॉटर की तरह तो नहीं है लेकिन यह दुनिया में सबसे सस्ता सुरक्षित पेयजल है।'बीस लाख रुपए की लागत से गांव में उपरोक्त तीनों साझीदारों ने मिलकर निहायत ही आसान और सस्ती तकनीक से यह वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है। यहां से हर दिन 8000 लीटर पानी साफ होता है। यूवी तकनीक से साफ किए गए पानी को 'सुलभ जल' नाम से 20 लीटर की बोतल में 10 रुपए प्रति बोतल की दर से भरकर घर-घर पहुंचाया जाता है।' 

खास बात यह है कि देश में अलग-अलग ब्रांड का बोतलबंद पानी जहां 15 से 20 रुपए प्रति लीटर की दर से मिलता है, ऐसे में महज पचास पैसे में साफ बोतलबंद पानी उपलब्ध करवाना एक अनूठी पहल है। यह पानी ऑगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य साधनों से गॉववालों के घरो को मुहैया कराया जाता है। उनका कहना है' धीरे-धीरे इस काम के लिए गाँव के युवाओं को प्रक्षिशण देकर उन्हे बैंकों से ऋण के जरिए यह काम उन्हे सौंप दिया जाएगा, ताकि वे स्वयं यह काम संभाल सकें 'उन्होंने कहा,'मेरा सपना है और इसकी पहल हमने कर दी है अब गॉवों के युवा सभी को सुरक्षित जल उपलब्ध कराने को आंदोलन बनाए, देशभर के युवा अपने अपने इलाकों में प्रदूषणमुक्त जल को इस बेहद सस्ती और आसान तकनीक से खुद शुद्ध कर अपनों को साफ पानी देने का सपना आसानी से पूरा कर सकते हैं।

मधुसूदनकाटी में ऐसे रोगग्रस्त लोगों का इलाज करने वाले डॉक्टर सुबलचंद्र सरकार ने बताया कि इस परियोजना के शुरू होने के बाद चर्म रोग,फेफड़े, दिल, लीवर दस्त, पेट की दूसरी बीमारियों और स्त्री रोग के मरीज़ों की संख्या में भारी कमी आई है। समिति के प्रमुख बताते हैं, इसी कारण चार लोगों की मौत भी हो चुकी है, गॉव में रहने वाली सुप्रिया घोष बताती हैं, पहले हम लोगों को गहरे ट्यूबवेल का फिल्टर किया हुआ पानी मिलता था। यह शुरू में कुछ दिन तो ठीक चला, पर बाद में उसके इस्तेमाल से लोगों की सेहत ख़राब होने लगी। 

राज्य के दक्षिणी इलाक़ों के 37 ब्लॉकों में रहने वाले दूसरे लोगों के पोखर में लगा एक छोटा संयंत्र कोई चारा नहीं था। उनके इलाक़े के पानी में आर्सेनिक मिला होने के कारण वह पीने लायक नहीं है। इस क्षेत्र के कम से कम आठ लाख लोग इस तरह का दूषित पानी पीने को मज़बूर हैं। गॉव के ही अन्य निवासी भुवन मंडल का भी कहना है, बरसों बरस से यह पानी पीने के बाद अब हमें लग रहा है कि हम और हमारे बच्चों को कम से कम पानी तो पीने लायक मिल सकेगा। 

इसी जिले के मंतोष विश्‍वास बताते हैं,ये सभी बीमारियां आर्सेनिक मिला पानी पीने से होती हैं। इनका इलाज दवा नहीं बल्कि साफ़ पानी का सेवन ही है। एक अन्य ग्रामीण बताते हैं, इस समस्या से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में करोड़ों रुपए ख़र्च कर आर्सेनिक दूर करने वाले संयंत्र लगाए, पर हालत जस की तस है। उन्हें उम्मीद है कि अब इस तकनीक को अपनाने से जिंदगी आसान हो सकेगी, खासतौर पर जब सुलभ उन्हे इस काम के लिए खुद बनाने के लिए तैयार कर रहा है। एक ग्रामीण के अनुसार, तालाब के ऊपरी सतह में पानी में आर्सेनिक नहीं होता है और यदि होता है तो उसकी मात्रा निहायत ही कम होती है, लेकिन नीचे भूमिगत पानी में आर्सेनिक का स्तर काफी होता है।

आर्सेनिक से आसपास के आठ लाख लोग प्रभावित हैं। गौरतलब है कि निकटवर्ती बांग्‍लादेश की ढाई से लेकर चार करोड़ से अधिक आबादी को भी आर्सेनिक प्रदूषित पानी पीना पड़ता है,जो कि विश्व स्वास्थ्‍य संगठन के मान्य मानकों से बीस गुना ज्यादा है भारत में यह मानक 0.05 प्रतिशत है लेकिन इस गॉव तथा देशभर में आर्सेनिक दूषण वाले इलाकों में कई गुना ज्यादा है। पश्चिम बंगाल में भी बड़ी आबादी उन इलाकों में रहती है जहां का पानी आर्सेनिक से बुरी तरह दूषित है। 

पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में साफ पानी पहुंचाने की योजना सफल होने के साथ ही सुलभ इंटरनेशनल इसे देश के बाकी हिस्सों में भी ले जाने की भी सोच रहा है। अगला पड़ाव बिहार, केरल और तमिलनाडु होगा, लेकिन साथ ही डॉक्‍टर पाठक कहते हैं, हम शुरुआत कर देते आगे बढ़ाने का काम तो स्थानीय लोगों को ही करना होगा, मुझे पूरी उम्मीद है कि इसे सभी स्थान पर लोग एक आंदोलन का रूप देंगे। मैला ढोने वाले कर्मियों को इस अमानवीय कुप्रथा से मुक्ति दिलाकर समाज की मुख्यधारा में शामिल करना, सफेद धोतियों की उम्रकैद भोग रही विधवाओ के जीवन को सम्मान देकर उनके जीवन में सतरंगी रंगों, और ऐसी ही अनेक जन कल्याण से जुड़ी मुहिम के बाद अब क्या साफ पानी पीने को तरसते लोगों की प्यास बुझाने की एक नई मुहिम? जबाव में डॉक्‍टर पाठक सिर्फ मुस्करा देते हैं। 

यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में 70 से अधिक देशों में 14 करोड़ से अधिक की आबादी आर्सेनिक मिले दूषित पानी पीने से प्रभावित है, और इनमें से ज्यादातर एशिया में रहते हैं, इससे बच्चों में अपंगता तक का खतरा रहता है एवं वयस्कों को त्वचा से सम्बद्ध विभिन्न रोगों से लेकर कैंसर जैसे रोगों यहां तक कि मौत का भी खतरा रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे होने वाली बीमारियों का इलाज नहीं है, सिर्फ इस पानी का सेवन रोकना होगा। 

गॉव से लौटते वक्त जीवनदायी बन चुके पोखर के पास बच्चे खेल रहे हैं, पुरुषों के चेहरों पर मुस्कान है, महिलाए ग्रुप में खड़ी खिलखिला रही हैं। गॉव का ही एक बच्चा प्रमीत सरकार रवीन्द्र नाथ टैगोर की एक कविता सुनाने के बाद हिंदी में कहता है, मैं डॉक्टर बनूंगा। डॉक्‍टर पाठक उसके सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद देते हुए कहते हैं, पढ़ाई पूरी करने में अगर कोई परेशानी आड़े आए तो बताना, वापसी में यह पोखर इतना खूबसूरत और अपना सा क्यों लग रहा है, यही सोच रही हुं मैं…।

Source : http://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/madhusudankati-115040500054_1.html