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September 11, 2017

सोनपुर। दिल्ली के लाल किले से पहली बार स्वच्छता की बात करनेवाले अकेले पीएम हैं मोदी जी। महात्मा गांधी के बाद वे पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने स्वच्छता को इतनी प्रमुखता दी। वे स्वच्छता संस्कृति को बदल रहे हैं। महात्मा गांधी ने कहा था- हमें स्वच्छ भारत पहले चाहिए, आजादी बाद में। गांधी और पीएम मोदी के बीच स्वच्छता एक सेतु है, जिसका नाम है सुलभ। भगवान राम लंकापति रावण को पराजित नहीं कर पाते यदि सेतु नहीं होता। सुलभ ही स्वच्छता अभियान का आधार बना। पीएम का यह स्वच्छता कार्यक्रम बिहार की देन है। 1968 से सुलभ यह कार्यक्रम चला रहा है। आज यह आदोलन का रूप ले चुका है। पीएम की घोषणा के बाद इसमें और गति आई है। इसे एक नया आयाम मिला है।

ये बातें सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ विंदेश्वर पाठक ने कहीं। वे बाबा बरिबरनाथ मंदिर में सत्संग भवन का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं। स्वागत से अभिभूत हूं। दूसरे की प्रशंसा में आदमी का जीवन कट जाता है, जिसकी प्रशंसा की जा रही है, उससे महान वो है, जो प्रशंसा कर रहा है। सोनपुर से मेरा पुराना लगाव है। मैं शिवभक्त हूं। उन्होंने शिव पंचाक्षर स्तोत्र का सस्वर पाठ किया। और इसके बाद तो उनके ज्ञान-सत्संग की धारा बने लगी। श्रोता सुनते रहे। तालियां, आह, वाह। कहा- पूजा-पाठ संस्कृतियां हैं। धर्म शाश्वत, सनातन है। जिसमें पिरवर्तन है। जैसे अग्नि जलाती है, यह उसका धर्म है। हमारा धर्म दया करना है। मिल-जुल कर रहें-धर्म है। सभी संस्कृतियों का सम्मान करें। ऐसे में एक-दूसरे से झगड़ा होगा ही नहीं।

संसार में भगवान ने जब सृष्टि का निर्माण किया तो मानव को सदगुण दिया। साथही अहंकार, लोभ, मोह, वासना व माया से भर दिया। फिर कहा संसार में जाओ। मनुष्य चार भाग में पैदा होता है। पहला संत- जिसका इच्छाओं पर नियंत्रण हो या इच्छा समाप्त हो गई हो, प्राकृतिक संपदा का उपयोग सबसे कम करता हो, जैसे गांधी जी। दूसरा साधु- शदी नहीं करे, ब्रह्मचर्य का पालन, त्याग-तपस्या-साधना से ऊर्जा, शक्ति, ज्ञान मिले और उसे समाज में बांटते हैं कि अच्छा जीवन कैसे जिएं। तीसरा इंसान- जितनी कमजोरियां ईश्वर ने दी हैं, अहंकार, लोभ, क्रोध, मोह, माया- ये सब जितना कम हो करे, गृहस्ताश्रम में। जीवन जीते हैं दूसरों के लिए, दूसरों की सहायता करते हैं। चौथा हैवान- कमजोरियों को बढ़ा लेते हैं, लूटना, मारना, छीनना, तंग करना-दुख देने के उपाय हैं।

पहला वाकया उन्होंने शरलॉक होम्स संबंधी सुनाया। होम्स अपने घर पर बैठे थे। उनके साथ उनका मित्र भी था। इसी बीच डाकिया पत्र दे गया। होम्स ने डाक को फाड़ा। चिट्ठी पढ़ी। और पत्र रख दिया। होम्स कुछ बोले नहीं। मित्र से नहीं रहा गया, पूछ बैठा- क्या है पत्र में। होम्स ने कहा- एक हत्या हो गई है, उसको सुलझाना है। सरकार पैसे कम देती है, पर काम तो करना है।

दूसरा वाकया। एक पंडितजी ने चिड़िया को देखा।वो जल कर फस्म हो गई। होटल में बैठे। उधर लसे ही मुर्दा जाता था। होटल का नौकर मुर्दा के पीछे लग जाता। लौटकर कहता- यह स्वर्ग में गया होगा। दूसरे मुर्दा के पीछे फिर नौकर गया। लौटकर बोला- यह नरक में गया होगा। पंडितजी से नहीं रहा गया। उन्होंने दुकानदार से पूछा नौकर क्या कहता है। उसने कहा-इतना भी नहीं जानते। जब कोई मरता है तो उसके दो भाग होते हैं- राम नाम सत्य है। फिर लोग कहते हैं भला आदमी था, मर गया। दूसरे में कहते हैं- भले मर गया बड़ा पापी था। तो सेवा से कीर्ति और नाम बना रहता है। हमारे हां वसुधैव कुटुंबकम कहा गया। ईश्वर जीव का निर्माण करता है।

तीसरा वाकया। अहंकार रोकें। अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गये। ह्वाइट हाउस के एक सिनेटर ने कहा- मिस्टर प्रेसिडेंट, आपके पिताजी मेरे पिताजी के जूते सीते थे। लिंकन ने जवाब दिया- यदि आपको जूते सिलवाना हो तो मेरे पास भेज दीजिएगा। मैं भी बढ़िया जूता सीता हूं। धन, ज्ञान, शक्ति के अहंकार पर जो नियंत्रण कर लिया वह महान है। ईमानदार रहने पर ही सिर ऊंचा कर सकते हैं।

चौथी कहानी ब्रिटेन के पीएम चर्चिल की है। चर्चिल ने एक बच्चे को पढ़ाया। आगे चल कर वो बड़ा डॉक्टर बन गया। चर्चिल एक बार बीमार पड़े। ठीक नहीं हो रहे थे। उन्हें उस बच्चे की याद आई,जो डॉक्टर बन गया था। उस डॉक्टर ने चर्चिल को ठीक कर दिया। वो डॉक्टर थे- एलेक्जेंडर फ्लेमिंग, जिन्होंने पेंसिलिन का आविष्कार किया था।

अध्यक्षीय भाषण बाबा हरिहरनाथ मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि बड़ा वो जिसके सामने छोटा से छोटा आदमी भी अपने को छोटा महसूस न करे। यही बड़प्पन है। अच्छा काम करने पर लोग उपहास उड़ाएंगे-यह प्रथम चरण है। दूसरे चरण में संघर्ष करेंगे, विरोध भी और लौट जाएंगे। तीसरे चरण में नहीं मानेंगे कि आपने अच्छा काम किया, उपहास, विरोध होता रहेगा। पर ऐसे में रुकना नहीं है। काम करते जाना है। सुकरात को जहरल पीना पड़ा था। जैसे पाठक जी ने 50 साल पहले जो काम शुरू किया था तब कितनी परेशानियां सहीं होंगी। आज देश ही नहीं दुनिया में सुलभ को सब जानते हैं।

डीजीपी ने कहा कि सूतजी को 88 हजार ब्राह्मण ऋषि-महर्षियों ने उनसे ज्ञान लिया। उनके कर्म के कारण। जबकि वो ब्राह्मण नहीं थे। कर्म से चेतना में बदलाव होता है। चेतना गिरती है तो समाज टूटता है।  सत्संग, अध्ययन, सेवा से चेतना ऊंची होती है। उन्होंने कहा- जीना क्या जब देना नहीं सीखे। तमोगुणी दया के पात्र हैं। वे घृणा के पात्र कदापि नहीं हैं। शेर भी पढ़ा-

जहां भी जाएगा चिराग जलाएगा, रोशनी का कोई मकां नहीं होता।

शुरू में डॉ पाठक ने मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मंच पर उनके साथ उनकी पत्नी अमोला पाठक, सुलभ इंटरनेशनल की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीमती आभा कुमार, मौनी बाबा अमनौर के भाजपा विधायक शत्रुघ्न तिवारी, सोनपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष अमजद हुसैन थे। डॉ पाठक व अमोला पाठक पर मंत्रोच्चार के साथ पुष्प वर्षा की गई। उन्हें चांदी के मुकुट से सम्मानित किया गया।  मंदिर न्यास समिति के ट्रस्टी व आज के संपादक दीपक पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

समिति के सचिव विजय कुमा  लल्ला ने बताया कि डॉ पाठक ने 20 लाख रुपये मंदिर के विकास कार्यों के लिए दान देने की घोषणा की। डॉ पाठक ने मंदिर के विकास कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर नवनिर्मित सत्संग भवन खचाखच भरा था। सत्संग की लहरों में लोग हिलोरे ले रहे थे। कोई अपनी जगह से हिलने का नाम नहीं ले रहा था। शुरू में कल्याणी ने स्वागत गान और राम भजन से सबका मन मोह लिया। सभी लोगों ने अंत में प्रसाद ग्रहण किया।

Source : https://www.hellobihar.in/bihar/modi-is-the-first-person-to-run-cleanliness-program-after-gandhi-dr-bindeshwar-pathak