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गुरुग्राम. मुख्य संवाददाता

24-03-2017

आचार्य निशांतकेतु सचल शब्दकोश : डा. विंदेश्वर पाठक

आचार्य निशांतकेतु एक सचल शब्दकोश हैं। मैंने जब भी उनसे कोई जिज्ञासा की, मुझे तुरत समाधान मिला। उनकी जिह्वा पर स्वयं सरस्वती विराजमान रहती हैं। वे शब्द-मनीषी हैं। यह विचार सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक व्यक्त किए। वे गुरुवार को आचार्य निशांतकेतु के पालम विहार में आयोजित 83 वें जन्मदिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने उनके स्वस्थ दीर्घायुष्य की कामना की। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने उन्हें ऋषि-परंपरा का व्यक्तित्व कहा। उन्होंने उनके साहित्य में योगदान की विस्तार से चर्चा की। डॉ. नंदलाल मेहता ‘वागीश’ ने कहा कि आचार्य निशांतकेतु शब्द-शिल्पी हैं। पुरातन और अधुनातन के समन्वय-पुरुष हैं। डॉ. अरुण कुमार भगत ने उनकी उत्कृष्ट भाषण-कला की चर्चा की। पंडि़त सुरेश नीरव ने अपने स्वस्ति-पत्र में उन्हें साहित्य का हिमाद्रि-व्यक्तित्व की संज्ञा दी।

डॉ. मधुकर गंगाधर ने उनके छात्र-जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि हम दोनों आचार्य नलिन विलोचन शर्मा के शिष्य रहे पर मैं यथार्थवादी हो गया और निशांतकेतु शास्त्रीय परंपरा के साथ यथार्थबद्ध भी रहे। ये एक विलक्षण छात्र भी थे और गुरु भी। मगध विश्वविद्यालय बोधगया के हिंदी-विभागाध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र वत्स, डॉ. रवि शंकर शर्मा,डॉ. राजेन्द्र नाथ मेहरोत्रा, देवेन्द्र कुमार बहल, रेवाड़ी के डॉ. रमेश चन्द्र शर्मा, डॉ. चन्द्रमणी ब्रह्मदत्त, ओंकारेश्वर पांडेय और प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडेय, जयप्रकाश विलक्षण, डॉ. पुष्पा सिंह बिसेन, सुनीता श्रुतिश्री, डॉ. प्रभा शर्मा, राधा, कांक्षा कौमुदी समेत 200 के करीब साहित्यकार एवं कवि उपस्थित रहे। सुलभ साहित्य अकादमी, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, हरियाणा-प्रांत, अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति, ग़ाज़ियाबाद एवं आर्यावर्त साहित्य-संस्कृति-न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘आचार्य निशांतकेतु दीर्घायुष्य-कामना-संगमनी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इन पुस्तकों को हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान आचार्य निशांतकेतु द्वारा संपादित पुस्तक ‘साक्षात्कार’, डॉ. जितेन्द्र वत्स द्वारा संपादित ‘आचार्य निशांतकेतु रचनावली’, डॉ. अशोक कुमार ज्योति की लिखित पुस्तक ‘निशांतकेतु की कहानियों में मानवतावादी संवेदना का प्रयोग-शिल्प’ और संपादित पुस्तक ‘निशांतकेतु की दलित-चेतना की कहानियां’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया।

Source : http://www.livehindustan.com/news/gurgaon/article1-gurugram-patna-acharya-nishantkete-sulabh-international-dr-vindeshwar-pathak–752241.html