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जागरण संवाददाता, मथुरा (वृंदावन): अपनों के द्वारा दुत्कारी गईं, कई दशक तक त्योहारों की खुशियों से महरूम रहीं निराश्रित महिलाओं के जीवन में रविवार को खुशी का एक और रंग भरने का अनूठा प्रयास किया गया। वृद्धा व विधवा महिलाएं खुद के द्वारा तैयार की गई ड्रेस पहनकर सेंटाक्लॉज बनीं और क्रिसमस का पर्व मनाया।

ज्ञानगुदड़ी स्थित मीरा सहभागिनी महिला आश्रय सदन में निराश्रित महिलाओं ने क्रिसमस ट्री को सजाया और मोमबत्तियां जलाई। केट काटा व सेंटाक्लॉज की भूमिका में वृद्धाओं ने उपस्थिजनों को टॉफी-चॉकलेट बांटी व केक खिलाया। दरअसल, सुलभ इंटरनेशनल संस्था की ओर से निराश्रित महिलाओं को खुशी प्रदान करने के उद्देश्य से रविवार को ज्ञानगूदड़ी क्षेत्र के मीरासहभागिनी महिला आश्रय सदन में क्रिसमस-डे मनाने को कार्यक्रम किया।

नब्बे वर्षीय मनुघोष को लाल टोपी, कॉटन और फलालिन के कपड़े का मफलर और कोटनुमा वस्त्र धारण कराये। एडीएम कानून व्यवस्था अरुण कुमार और डीपीओ ओपी यादव की मौजूदगी में निराश्रित महिलाओं ने उत्साह से लबरेज होकर भजन-गायन भी किया।

सुलभ इंटरनेशल संस्था के मीडिया प्रभारी मदन झा का कहना है कि इस तरह से आयोजन कर निराश्रित महिलाओं को छोटी-छोटी खुशी देने का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि इससे पूर्व सुलभ के सहयोग से निराश्रित महिलाओ को इसी वर्ष होली, दीवाली और दुर्गापूजा पर्व मनाने का भी अवसर प्राप्त हुआ था।

प्रदर्शनी लगाई, अब मोमबत्ती की ट्रेनिंग

वृंदावन: सुलभ होप फाउंडेशन की उपाध्यक्ष विनीता वर्मा का कहना है कि आश्रय सदनों की निराश्रित महिलाओं को मोमबत्ती बनाना सिखाया जायेगा। इसके लिये दो प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। जबकि ज्ञानगुदड़ी क्षेत्र के मीरासहभागिनी महिला आश्रय सदन की महिलाओं द्वारा तैयार किये गये वस्त्रों की दिल्ली में प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें उपलब्ध सभी वस्त्र बिक गये।

Source : http://hindi.yahoo.com/uttar-pradesh-10954137-144932480.html